Wednesday, August 17, 2022
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MeerutPoliceटीम द्वारा शादी कराने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी गिरोह का पर्दाफाश। Fake gang who cheated in the name of getting married by MeerutPolice team busted.

विजय भारत News जो कहूंगा सच कहूंगा।

MeerutPoliceटीम द्वारा शादी कराने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी गिरोह का पर्दाफाश। Fake gang who cheated in the name of getting married by MeerutPolice team busted.

बतादे की 29 July 2022 को थाना मेडिकल पर वादी अमित शर्मा पुत्र मुरलीघर शर्मा निवासी परम नगर करावल नगर दिल्ली, मनोज श्रीवास्तव पुत्र अशोक श्रीवास्तव निवासी गली नं0 -78 जगदीश नगर शाहदरा दिल्ली. तथा लवकेश गुप्ता पुत्र चन्द्रमोहन गुप्ता निवासी राया जिला मथुरा द्वारा अभियुक्तगण नीरज गर्ग व डिम्पल आदि के विरुद्ध विवाह पंजीकरण केन्द्र खोलकर उनका विवाह कराने के नाम पर फर्जी तरीके से पैसा हड़प किये जाने के सम्बन्ध में

Picsart 22 07 30 11 25 25 795मु0अ0सं0- 310/2022 धारा 419,420 भादवि मु0अ0सं0- 311/2022 धारा 419,420 भादवि तथा मु0अ0सं0- 312/2022 धारा 419,420 भादवि पंजीकृत कराये गये । उक्त अभियोग की विवेचना के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ के कुशल निर्देशन में पुलिस अधीक्षक नगर मेरठ व पुलिस अधीक्षक अपराध के पर्यवेक्षण में क्षेत्राधिकारी सिविल लाईन व क्षेत्राधिकारी अपराध जनपद मेरठ महोदय के नेतृत्व में चलाये जा रहे वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी व चौकिंग संदिग्ध व्यक्ति/वाहन के अभियान के दौरान प्रभारी ए0एच0टी0यू0, प्रभारी सर्विलांस सैल, प्रभारी महिला थाना व प्रभारी निरीक्षक थाना मेडिकल पुलिस की संयुक्त कार्यवाही के दौरान उपरोक्त अभियोगो की घटनाओं में संलिप्त निम्नलिखित अभियुक्तगण को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। उक्त सम्बन्ध मे थाना मेडिकल पर विधिक कार्यवाही की गयी है।

गिरफ्तार अभियुक्तगण ने पूछताछ पर बताया कि फरार अभियुक्त नीरज गर्ग व उसके सहयोगी कु0 डिम्पल ने मिलकर गोपाल प्लाजा मेंडीकल में विवाह पंजीकरण केन्द्र नाम से कार्यालय खोल रखा है, जिसमें हम लोग नौकरी करते हैं। नीरज गर्ग ने विवाह पंजीकरण केन्द्र का प्रचार अखबार तथा सोशल मीडिया पर किया हुआ है, जिसको पढ़कर स्थानीय व अन्य जनपद/राज्य के विवाह हेतु इच्छुक लोग फोन पर वार्ता करते थे, जिनको कार्यालय में बुलवाया जाता था, जिनसे पंजीकरण के नाम पर 8500/- आठ हजार पॉच सौ रुपये लिये जाते थे। उसके उपरान्त लड़की दिखाने तथा उसके परिजनों से मिलाने के लिये कोई दिनांक नियत की जाती थी, नियत दिनांक पर कार्यालय में काम करने वाली किसी एक लड़की को तैयार कर मिलवाया जाता था लड़की के साथ कार्यालय के ही महिला/पुरुष को अभिभावक के रुप में लड़के पक्ष से मिलवाया जाता था। दोनो पक्ष एक दूसरे का नम्बर आदान प्रदान करते थे कुछ समय बाद पूर्व योजना के तहत लड़की विवाह हेतु इच्छुक आवेदन किये गये पुरुष से फोन पर बात करने लग जाती थी और उसको अपनी आवश्यकता या बीमारी का हवाला देकर पैसे प्राप्त करती थी, कुछ समय बाद धीरे धीरे फोन पर बात करना बन्द कर देती थी । फिर किसी अन्य ग्राहक को इसी तरह फंसाकर धोखाधड़ी से पैसे हड़प करते हैं।

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